शनिवार, 20 अगस्त 2011

याहू जंगली शम्मी कपूर साहब



एक सप्ताह पहले ही शम्मी कपूर का निधन हुआ। पचास साल पहले प्रदर्शित सुबोध मुखर्जी की फिल्म जंगली, उनके कैरियर में ऐसी फिल्म साबित हुई जो लगातार साठ हफ्ते चलने के बाद उनके लिए एक यादगार बन गयी। जंगली में उनके गाये गाने, चाहे कोई मुझे जंगली कहे, में याहू कहकर अपनी खुशी जाहिर करने का अन्दाज उनकी स्थायी पहचान बन गया। शम्मी कपूर ने यों दो सौ से ज्यादा फिल्मों में काम किया होगा मगर उनकी पन्द्रह-बीस शानदार फिल्मों में जंगली की चर्चा विशेष उल्लेख के साथ होती है।

जंगली, इस्टमेन कलर फिल्म थी जिसके गाने हसरत जयपुरी और शैलेन्द्र ने लिखे थे। फिल्म के संगीतकार शंकर-जयकिशन थे। इसके सभी गाने हिट थे। शम्मी कपूर के लिए मोहम्मद रफी जरा अलग से गाते थे, उनके व्यक्तित्व के अनुरूप मस्ती और मिजाज को अपने में आत्मसात करके। एक गीत का जिक्र तो अभी ऊपर हुआ ही, इसके साथ ही एहसान तेरा होगा मुझ पर, अइ अइया सूकू सूकू, नैन तुम्हारे मजेदार ओ जनाबे-आली जैसे गानों को हम आज भी याद रखते हैं।

जंगली फिल्म की कहानी यों कोई विशेष नहीं है। एक परिवार है राजघराने का जिसमें माँ है, बेटा है, बेटी है। चेहरे पर बिना किसी संवेदना, बिना किसी भाव के बात करनी होती है। मतलब की बात चन्द शब्दों में होकर बात खत्म होती है, सब अपना-अपना काम करते हैं। उठने-बैठने, खड़े होने, चलने सबका अनुशासन है। बेटा शेखर विदेश से आया है, अपनी कम्पनी सम्हाल रहा है। सभी को खींचकर रखा है, दस सेकेण्ड विलम्ब से आने पर दस दिन के लिए सस्पेण्ड कर देता है अपने कर्मचारी को। बैरा घर में बिना पगड़ी साफे के खाना परोसने आ जाता है, तो भूचाल आ जाता है।

ऐसे में ही एक घटना के चलते उसे कश्मीर जाना पड़ता है, अपनी बहन के साथ। यहीं से उसके जीवन में परिवर्तन आता है जब एक शोख-सुन्दर और चुहलबाज लडक़ी राजकुमारी से उसकी मुलाकात होती है। पहला सीन बहुत अच्छा है जिसमें वो बर्फ का गोला नायक को मारती है और कहती है कि मैंने तो बन्दर को मारा था। नायिका ही उसके जीवन को रंगीन बनाती है। कहानी प्यार की खूबसूरती और मजे से आगे बढ़ती है। सुधरकर लौटे नायक से माँ भी चकित है। फिल्म में मामूली से खलनायक हैं और मामूली सी ही मारपीट। फिल्म के अन्त में सब ठीक हो जाता है।

शम्मी कपूर और सायरा बानो ही दरअसल इस फिल्म को रंगते हैं। आश्चर्य होता है इस बात पर कि जंगली जैसे नितान्त अप्रभावित करने वाले नाम पर ऐसी सुपरहिट डायमण्ड जुबली फिल्म बन गयी। फिल्म में अनूप कुमार और शशिकला पर ही नैन तुम्हारे मजेदार ओ जनाबे आली गाना फिल्माया गया है, मतलब मुकेश की आवाज पर अनूप की अदा।

इस फिल्म को देखना, कश्मीर के मनोरम स्थलों की भी रूमानी यात्रा करने जैसा अनुभव है। आधी सदी पहले की इस फिल्म को देखते हुए जब आज के सन्दर्भ में यह याद आता है कि शम्मी अब नहीं हैं, तो दुख होता है।

2 टिप्‍पणियां:

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

Shammi kapur ji ko Vinamra shraddhanjali.

सुनील मिश्र ने कहा…

aapka abharee hoon lalit jee.