शनिवार, 18 जून 2011

सौवें बसन्त में एक नायाब कलाकार जोहरा सहगल


जानकर बड़ा सुखद लगता है कि सिनेमा और रंगमंच की एक नायाब कलाकार जोहरा सहगल अपने जीवन का शताब्दी वर्ष की बेला देख रही हैं। उनका नाम लेते ही हमारे जेहन में उनकी चिर-परिचित, जानी-पहचानी और अनूठी छबि प्रकट हो जाती है। उनकी सर्जना लम्बी और असाधारण होने के साथ-साथ निरन्तर जारी रहने वाली है। यही उनकी यशस्वीयता है। वे अभी उम्र और अस्वस्थता की वजह से चल-फिर नहीं पातीं मगर सजगता, चेतना और जागरुकता के लिहाज से वे किसी भी युवा की झेंप का कारण बन सकती हैं। ध्यान करो तो उनका एक विज्ञापन स्मरण हो आता है जिसमें वे रावलपिण्डी एक्सप्रेस शोएब अख्तर को चुनौती देती हैं।

जोहरा जी अपनी उपस्थिति में, संवाद अदायगी और अभिव्यक्ति में जितनी खूबियों के साथ हमारे सामने होती हैं, अद्भुत और असाधारण होती हैं। व्यक्तिश: मुझे उनकी एक फिल्म चीनी कम बहुत ही अच्छी लगती है जिसमें उन्होंने अमिताभ बच्चन की माँ की भूमिका निभायी है। इस फिल्म में वे एक श्रेष्ठ और प्रभावी सितारे की उपस्थिति से भी निष्प्रभावी नजर आती हैं। अमिताभ बच्चन के साथ उनके दृश्य कमाल के हैं, जो दिलचस्प भी लगते हैं और मनोरंजक भी। जोहरा सहगल लगभग चालीस के दशक से लगातार काम कर रही हैं। वे पश्चिम में प्रख्यात बैले कलाकार उदयशंकर के बैले ग्रुप की एक प्रस्तुति से प्रभावित होकर पहले नृत्य के क्षेत्र में आयीं फिर कोरियोग्राफर के रूप में सक्रिय हुईं। उन्होंने उदयशंकर के ग्रुप में लम्बे समय काम किया और अल्मोड़ा में उनकी संस्था की लम्बे समय संचालक रहीं।

जोहरा सहगल के पति कामेश्वर सहगल, एक वैज्ञानिक होने के साथ-साथ चित्रकार और नृत्यकार भी थे। यायावरी रंगकर्म के अकेले उदाहरण स्वर्गीय पृथ्वीराज कपूर के साथ जुडक़र उन्होंने उनके साथ कई नाटकों में काम किया। वे पृथ्वी थिएटर का अहम हिस्सा रही हंै। इप्टा से जुडऩे के बाद पहली बार नाटकों से होते हुए फिल्मों का रास्ता उन्होंने ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म धरती के लाल से तय करना आरम्भ किया। प्रख्यात निर्देशक चेतन आनंद की नीचा नगर में भी अहम भूमिका में वे थीं। स्वर्गीय गुरुदत्त की फिल्म बाजी, स्वर्गीय राजकपूर की फिल्म आवारा की कोरियोग्राफर के रूप में उनका काम यादगार है। बीच में दशकों के अन्तराल के बाद जोहरा सहगल अंग्रेजी धारावाहिकों और फिल्मों, खासकर एनआरआई फिल्मों से एक बार फिर सक्रिय हुईं।

गजब यह है कि यह सक्रियता उन्होंने अस्सी साल की उम्र के बाद दिखायी। तन्दूरी नाइट्स को उनका श्रेष्ठ टीवी धारावाहिक माना जाता है और उल्लेखनीय फिल्मों में भाजी ऑन द बीच, दिल से, ख्वाहिश, हम दिल दे चुके सनम, बेण्ड इट लाइक बेकहम, साया, वीर-जारा, चिकन टिक्का मसाला, मिस्ट्रेस ऑफ स्पाइसेज, चीनी कम, साँवरिया शामिल हैं। जोहरा सहगल का हमारे बीच होना कला-अनुरागी समय की, खासकर जो इस समय का संजीदा हिस्सा हैं, एक बड़ी सुखद अनुभूति है। देश में कला-संस्कृति के संरक्षण की जिम्मेदार सरकार, विभाग को उनकी उपस्थिति में उनका जन्मशताब्दी वर्ष मनाना चाहिए।

1 टिप्पणी:

कुँअर रवीन्द्र ने कहा…

जोहरा जी के विषय में बहुत कम लिखा गया है धन्यवाद् आपको , वे और-और दीर्घायु हों यही हार्दिक कामना है , निःसंदेह वे एक बेहतरीन कलाकार हैं