मंगलवार, 28 सितंबर 2010

अमरबेल सी लता और अमृतकंठी स्वर

इक्यासीवें वर्ष में लता जी प्रवेश कर रही हैं, हम एक यशस्वी उम्र में अपने भारत के महान सांस्कृतिक गौरव को इस प्रकार देखकर मन में जिस तरह का सुख अनुभव कर रहे हैं वह अनूठा है। शायद उस अनुभूति की ठीक-ठीक अभिव्यक्ति करते हमको न आये क्योंकि लता जी के व्यक्तित्व और गरिमा के साथ-साथ स्वर-साधिका के कल्पनातीत विलक्षणपन के बारे में अब तक वक्त-वक्त पर बहुत बार लिखा गया है। उनके प्रति केवल फिल्मों पर लिखने वाले लेखक या जानकार ही पर्याप्त नहीं हुए हैं बल्कि उनकी वाणी को अनुभूत करके साहित्य की अनन्य विधाओं में लिखने वालों ने भी अपनी व्याख्या की है, अपने मुहावरे दिए हैं।

लता जी का जीवन, उनका संघर्ष, उनकी साधना, शनै: शनै: का परिमार्जन, एक-एक करके प्राप्त होने वाली उपलब्धियाँ, मान-सम्मान और यश तथा भारतभूमि को गौरवान्वित करने वाली विश्वव्यापी प्रतिष्ठा के प्रति कितनी ही व्याख्याएँ हमारी निगाहों से गुजरी हैं। महान यश किसी भी गरिमापूर्ण और धरा से अटूट सम्बद्धता रखने वाले व्यक्तित्व को कितना सरल, कितना सहज और कितना सुसंस्कृत बनाते हैं, यह लता जी को देखकर हम हमेशा महसूस करते हैं। एक पूरा जीवन नितान्त सर्जना के लिए समर्पित हो, अपनी वाणी से सभी को खुशियाँ और सुख ही बाँटा हो, जिन्दगी जीने की प्रेरणा दी हो, प्रेम करना सिखाया हो, नैतिक होने का मार्ग बतलाया हो, कल्पनाओं में एक खूबसूरत दुनिया की छबि सजीव बनाकर सामने रखी हो, यह सब एक आवाज ने हमारे सौ साल के समय में करके दिखाया है।

यह कितनी महत्वपूर्ण बात है कि देश का शायद ही ऐसा कोई प्रतिष्ठित और गरिमापूर्ण सम्मान होगा जो लता जी को न मिला हो। ऐसा लगता है कि बहुत से सम्मानों ने उनसे जुडक़र ही अपने होने की सार्थकता पायी है। भारतीय सिनेमा की शताब्दी बराबर की परम्परा में लता जी का स्वर कितनी ही नायिकाओं के चेहरे और अधरों से उनकी आवाज बनकर प्रस्फुटित होता रहा है। लता जी ने कभी किसी नायिका का चेहरा देखकर नहीं गाया मगर हर नायिका पर उनका गाया गीत ऐसा फबा जैसे वह उस नायिका की ही आवाज हो। ऐसी बहुत सी छोटी-छोटी चीजें ध्यान आती हैं जिनमें से लता जी के व्यक्तित्व और कला के आयामों को हम जान पाते हैं।

दिलीप कुमार जैसे भारतीय सिनेमा के महानायक जब लगभग चार दशक पहले लन्दन के अल्बर्ट हॉल में लता जी के पहले कन्सर्ट के समय उनका परिचय अपनी बहन कहकर कराते हैं जो जैसे पूरी दुनिया सुनती है। लता जी भारतीय संस्कृति, परम्परा और हमारी अस्मिता की एक अनमोल धरोहर हैं, हमें ईश्वर से उनकी शतायु की प्रार्थना करके उनको अपनी शुभकामनाएँ देना चाहिए।

4 टिप्‍पणियां:

sada ने कहा…

आपके माध्‍यम से हमारी भी शुभकामनायें हैं लता जी के जन्‍मदिवस पर, ये अमृतकंठी सचमुच भारत का गौरव हैं, सुन्‍दर लेखन ।

shashiprabha ने कहा…

Lataji to sach me desh ki dharohar hain!

सुनील मिश्र ने कहा…

सदा, आपका आभारी हूँ, आपको टिप्पणी पसंद आई।

सुनील मिश्र ने कहा…

शशि जी, आपका कथन सच है।