बुधवार, 8 सितंबर 2010

फिल्मों के यादगार रेल-गीत

दुलाल गुहा ने अब से तकरीबन तीन दशक पहले दोस्त फिल्म निर्देशित की थी जिसकी शुरूआत, नामावली से होती है और कैमरा नायक धर्मेन्द्र पर फोकस होता है जिसमें वो फादर फ्रांसिस का पत्र पढ़ रहे हैं। फादर फ्रांसिस की परवरिश से बड़ा हुआ नायक पत्र में उनका चेहरा देखता है। पत्र पढऩा शुरू होता है और नायक बचपन की यादों में चला जाता है। वो छोटी उम्र का बच्चा है, फादर फ्रांसिस उसे जाती हुई रेल के पास खिला रहे हैं और गाना गा रहे हैं, गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है, चलना ही जिन्दगी है, चलती ही जा रही है। किशोर कुमार ने यह गीत गाया भी बड़े वेग से है जो यकायक एकाग्र करता है, सुनने वाले हो। रेल, दोस्त फिल्म की फिलॉसफी में मुख्य भूमिका निभाती है। रेल के माध्यम से जीवन का दर्शन है। बहुत सारी घटनाएँ, दृश्य में रेल पाश्र्व में दिखायी देती है, कभी उसकी ध्वनि और सीटी भी।

हिन्दी फिल्मों में याद करने पर ऐसे कई अनूठे गीत याद आते हैं, जिनका अस्तित्व रेल के साथ ही घटित होता है। रेल में बैठकर, रेल के आसपास उसे देखते हुए, उसका आना-जाना, सीटी बजाना सब हमें प्रभावित करता है। उसकी छुक-छुक करती आवाज हम सबकी चेतना में बड़ी छोटी उम्र से ऐसी बसी है जो आज बिजली के इन्जनों के बावजूद भुलायी नहीं जा सकती है। हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म आशीर्वाद में दादा मुनि अशोक कुमार की आवाज में गाया गीत, रेलगाड़ी, रेलगाड़ी, छुकछुक-छुकछुक, बीच वाले स्टेशन बोलें रुक-रुक-रुक-रुक, भुलाया नहीं जा सकता। बचपन में हम अपने मित्रों के साथ एक-दूसरे के पीछे खड़े होकर, शर्ट और फ्रॉक पकडक़र रेलगाड़ी का खेल खेला करते थे। आशीर्वाद के गीत में वही स्मृतियाँ ताजा होती हैं।

सुभाष घई निर्देशित फिल्म विधाता में, सुरेश वाडकर और अनवर का गाया गीत, हाथों की चन्द लकीरों का, सब खेल है बस तकदीरों का, भी भुलाया नहीं जा सकता। यह गाना भारतीय सिनेमा के दो बड़े कलाकारों दिलीप कुमार और शम्मी कपूर के ऊपर फिल्माया गया था। रवि चोपड़ा निर्देशित द बर्निंग ट्रेन में, तेरी है जमीं, तेरा आसमा गीत, सिमी ग्रेवाल और बच्चों पर फिल्माया गया था। वह गीत भी ईश्वर की अच्छी प्रार्थना है। राजेश खन्ना और जीनत अमान पर फिल्माया अजनबी फिल्म का गाना भी खूबसूरत संगीतबद्ध किया हुआ है, हम दोनों दो प्रेमी दुनिया छोड़ चले, जीवन की हम सारी रस्में तोड़ चले। आज की पीढ़ी को हो सकता है, इन गानों की उतनी याद हो, न हो मगर मणि रत्नम की फिल्म दिल से का शाहरुख खान और मलायका पर फिल्माया गाना, चल छैंया-छैंया, छैंया-छैंया, जरूर याद होगा जो गुलजार ने लिखा था।

2 टिप्‍पणियां:

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

हिन्दी का विस्तार-मशीनी अनुवाद प्रक्रिया, राजभाषा हिन्दी पर रेखा श्रीवास्तव की प्रस्तुति, पधारें

Atul Sharma ने कहा…

सुनीलजी एक और गीत का उल्लेख किया जा सकता है, क्योंकि मुझे लगता है कि यह भी पर्याप्त लोकप्रिय है और फ़िल्मांकन भी बहुत सुंदर है। यह गीत फ़िल्म 'जमाने को दिखाना है' का 'होगा तुमसे प्यारा कौन...' है। इसे ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे पर फ़िल्माया गया है।