रविवार, 12 सितंबर 2010

मुन्नी बदनाम और बाम की बिक्री

आयटम सांग से फिल्में हिट होती हैं इसका ताजा उदाहरण दबंग फिल्म है। मुन्नी बदनाम हुई, मलायका अरोड़ा के प्रोमो से दबंग का जिस तरह क्रेज बढ़ा उसका नतीजा है कि सिनेमाहॉल में शुक्रवार को भारी भीड़ इक_ा हुई जो सलमान क्रेज के साथ-साथ ऐसे आकर्षणों को भी एन्जॉय करने पहुँची थी। हाँलाकि दबंग को केवल इस आयटम सांग ने हिट नहीं कराया, और भी बहुत से कारण फिल्म की सफलता के लिए शामिल किए गये थे। एक मुकम्मल मसाला फिल्म के रूप में इस फिल्म में वो सब कुछ था, जो पिछले कुछ समय की तमाम एक के बाद एक नीरस फिल्में देखते और बेहाल-बोर होते हुए दर्शकों के लिए आकर्षण बना। सलमान यदि एक साल में एक ऐसी फिल्म देते हैं तो भी उनका वजन चार दूसरी बड़ी फिल्म देने वाले उनके समकालीन सितारों से ज्यादा ही रहता है, यह स्पष्ट है।

बहरहाल आयटम सांग के जरिए ही एक और प्रोमो लोकप्रियता की सीढिय़ों पर ऊपर जा रहा है। यह फिल्म है आक्रोश। प्रियदर्शन की बड़े लम्बे समय बाद, लगभग गर्दिश के बाद यह तनाव से भरी एक फिल्म आ रही है, जिसमें एक डाँसर, तेरे इसक से मीठा कुछ भी नहीं गा रही है। आयटम सांग, अब एक नये ढंग का आकर्षण बनकर स्थापित हुआ है। एक जमाना था, जब एक पूरी फिल्म में कुक्कू, बिन्दू, पद्मा खन्ना या हेलन के कैबरे डाँस का अन्दाज दर्शकों को रस देता था। इन अभिनेत्रियों की उपस्थिति फिल्मों में वैम्प के तौर पर ही होती थी मगर हीरोइनों से एकदम विपरीत इनका एंटी अन्दाज दर्शकों को लुभाता था। धीरे-धीरे इनकी जगह खत्म होती चली गयी और नायिकाएँ ही इतना खुल गयीं कि लोगों को बाद में किसी बिन्दु या हेलन की याद नहीं आयी। पाँच-सात वर्षों में आयटम सांग के रूप में एक ऐसा चलन बढ़ा जिसको सभी हीरोइनों ने आजमाया और अपनी साख बढ़ायी।

बंटी और बबली में ऐश्वर्य ने कजरारे कजरारे गाने पर जमकर डाँस किया। प्रकाश झा ने अपनी गम्भीर फिल्मों में भी आयटम सांग की गुंजाइश बनायी। प्रीटि जिण्टा, लारा दत्ता, करीना, सुष्मिता, प्रियंका चोपड़ा सभी ने आयटम सांग करने के मौके हाथ से जाने नहीं दिए। राखी सावन्त और मल्लिका शेरावत तो खैर इस फील्ड में सर्वाधिक अग्रणी और साहसी मानी जाती हैं। दिलचस्प यह है कि ऐसे आयटम सांग सभी आंचलिक संगीत से प्रेरित होकर लिखे जाते हैं और बड़े गीतकार बुन्देेलखण्ड, बिहार, उत्तरप्रदेश के लोकसंगीत और तर्ज पर मिलते-जुलते शब्द बैठाकर अपना सिक्का बुलन्द किया करते हैं। मुन्नी बदनाम हुई, के बारे में भी यही कहा जा रहा है। एक दर्द निवारक बाम को मुफ्त में खासा प्रचार मिल गया। सम्भव है, दवा दुकानों में इसकी डिमाण्ड बढ़ जाए।

4 टिप्‍पणियां:

गजेन्द्र सिंह ने कहा…

बढ़िया लेख है अभी पूरा तो नहीं पढ़ा पर पढेंगे जरुर ....

मुस्कुराना चाहते है तो यहाँ आये :-
(क्या आपने भी कभी ऐसा प्रेमपत्र लिखा है ..)
(क्या आप के कंप्यूटर में भी ये खराबी है .... )
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आपके विचारों से सहमत हूँ.. आजकल दर्शकों के स्वाद बदल गए हैं की उन्हें बिंदु रेखा के केबरे कहाँ याद आते है .....

सुनील मिश्र ने कहा…

गजेंद्र जी, प्रशंसा के लिए आभार। ज़रूर पूरा पढ़िएगा। अच्छा लगा।

सुनील मिश्र ने कहा…

धन्यवाद महेंद्र जी।