गुरुवार, 16 सितंबर 2010

उत्तरार्ध की सम्भावनाएँ और माहौल

साल का पूर्वार्ध सिनेमा के लिहाज से बहुत ज्यादा उल्लेखनीय नहीं रहा था। थ्री ईडियट्स और राजनीति को छोडक़र कोई ऐसी फिल्म नजर नहीं आयी थी जिसने अच्छा बाजार हासिल किया हो, निर्माता-निर्देशक और कलाकारों को खुशी देने का काम किया हो, दर्शकों को अच्छा मनोरंजन देने का कोई फर्ज निभाया हो। गर्मी के मौसम में सिनेमाघरों की हालत सबसे ज्यादा बुरी थी। मल्टीप्लेक्स के शो खाली जा रहे थे या निरस्त हो रहे थे। खेलों के माहौल ने और दर्शकों को कैद करके घर में बैठा लिया था। ऐसे में सपरिवार हजारों में खर्च करके बुरी फिल्म कौन देखने जाए भला?

इन स्थितियों में फिल्म व्यवसाय के इस साल ज्यादा खराब होने का आकलन किया गया। सलमान खान की फिल्म दबंग अपनी तरह से आयी। बहुत पहले से इसके नाहक बाजे नहीं बनाए गये और न ही अतिरिक्त प्रचार किया गया। दबंग का प्रचार हाल के एक माह की उपलब्धि है और जो कुछ प्रतिसाद उसको मिला, वो उसकी मुकम्मल मेकिंग को ही मिला है जिसमें रोचक तारतम्यता, दिलचस्प मनोरंजन, बेहद प्रभावित करने वाला नायक और बाकी एक अच्छी मसाला फिल्म के लिए अपरिहार्य लटके-झटके शामिल हैं।

यह बात ठीक है कि दबंग की सफलता का माहौल अभी कम से कम दो हफ्ते अच्छा रहने वाला है लेकिन उसके ठीक पीछे अक्टूबर माह की पहली तारीख को प्रदर्शित होने वाली प्रियदर्शन की गम्भीर फिल्म आक्रोश को भी टेलीविजन पर अच्छा रुझान अर्जित करते देखा जा रहा है। इरशाद कामिल ने इस फिल्म के गीत लिखे हैं जिसमें एक गीत, मन के मत पे मत चलियो रे....अपनी धुन और शब्द-भाव से प्रभावित कर रहा है। त्यौहारों और उल्लास के मन-मौसम में अच्छी फिल्में यदि आ रही हैं तो यह संकेत अच्छे हैं। हम मानकर चलते हैं कि दिसम्बर तक जो फिल्में आ रही हैं, जिनकी संख्या कम से कम तीस-चालीस तो होगी, उसमें चार-पाँच ऐसी होंगी जो दर्शकों को सिनेमाहॉल तक ले आयेंगी।

चर्चित फिल्मों में, जो इस साल सिनेमा के परदे पर नजर आयेंगी, उनमें अन्जाना-अन्जानी, रोबोट, नॉक आउट, पान सिंह तोमर, गोलमाल तीन, गुजारिश, खेलें हम जी जान से, तीस मार खाँ, यमला पगला दीवाना प्रमुख रूप से शामिल हैं। दीपावली का अवसर खासतौर से फिल्मों के जश्र का अवसर होता है। हाँलाकि ऐसा लग रहा है कि इस अवसर पर गोलमाल का तीसरा भाग अकेला अपना इम्तिहान देगा। अपने जमाने के मशहूर विलेन शेट्टी के बेटे रोहित शेट्टी ने इसमें भरपूर मनोरंजन इक_ा किया है। हाँ दिसम्बर में जरूर तीन-चार अच्छी फिल्में अपनी आजमाइश में रहेंगी।

1 टिप्पणी:

राजभाषा हिंदी ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

मशीन अनुवाद का विस्तार!, “राजभाषा हिन्दी” पर रेखा श्रीवास्तव की प्रस्तुति, पधारें